पाकिस्तान के सन्दर्भ मे (मेरी क़लम का फॅट्का नंबर ५)
"एक वाक़्या है तुमको सुनाता हू क़लम से
माँगी थी तुमने कुछ ज़मी हमारे वतन से
पसीज के दिल रख दिया और दे दिया हिस्सा
तुम नामुराद ने शुरू फिर कर दिया किस्सा
अब घूरते हो तुम हमे शैतान नज़र से
करते हो मार काट ये कश्मीर की लत से
बनते हो दोस्त सामने पर पीठ के पीछे
खनज़र की धार तेज हो करते गुरूर से
अरे मारना है सामने आ कर के मार दो
अपने नक़ाब की ज़रा चादर उतार दो
पर याद ये रखना की सबर एक हद ही है
पानी भी सिरगुज़र है रहम एक हद ही है
अपने पे आ गये तो तुम्हे कोई भी शरीफ
अपनो से आ गये तो तुम्हे कोई भी हफ़ीज़
साबुत ना रख सकेगा तुम्हे और ज़िस्म को
दो गज़ ज़मी उधार की माँगे ना मिलेगी
तेरी रूह भी अल्लाह को पूरी ना मिलेगी
लो काम ज़रा सब्र से और प्यार से रहो
हू साफ साफ कह रहा औकात से रहो
हू शान से मै लिख रहा पढ़ लो ओ पाकिस्तान
भारत से हू पहले ना समझना तु मुसलमान"........(वरना एक छोटे युद्ध की तैयारी पूरी है)
............रिज़वान.........
"एक वाक़्या है तुमको सुनाता हू क़लम से
माँगी थी तुमने कुछ ज़मी हमारे वतन से
पसीज के दिल रख दिया और दे दिया हिस्सा
तुम नामुराद ने शुरू फिर कर दिया किस्सा
अब घूरते हो तुम हमे शैतान नज़र से
करते हो मार काट ये कश्मीर की लत से
बनते हो दोस्त सामने पर पीठ के पीछे
खनज़र की धार तेज हो करते गुरूर से
अरे मारना है सामने आ कर के मार दो
अपने नक़ाब की ज़रा चादर उतार दो
पर याद ये रखना की सबर एक हद ही है
पानी भी सिरगुज़र है रहम एक हद ही है
अपने पे आ गये तो तुम्हे कोई भी शरीफ
अपनो से आ गये तो तुम्हे कोई भी हफ़ीज़
साबुत ना रख सकेगा तुम्हे और ज़िस्म को
दो गज़ ज़मी उधार की माँगे ना मिलेगी
तेरी रूह भी अल्लाह को पूरी ना मिलेगी
लो काम ज़रा सब्र से और प्यार से रहो
हू साफ साफ कह रहा औकात से रहो
हू शान से मै लिख रहा पढ़ लो ओ पाकिस्तान
भारत से हू पहले ना समझना तु मुसलमान"........(वरना एक छोटे युद्ध की तैयारी पूरी है)
............रिज़वान.........
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